ये गुलाबी कली हैं जो अभी अभी है खिली
हमारी आँखों में प्रतिबिम्ब जो उसका बना
हमारे दिल मेें एक हलचल सी हुई हैं
आज फिर जगे हैंं वो पुराानेें सपनेंं
आज फिर अपने आप सेे आया हूँ मिलने
कभी जो सोची थी हमारी कहानीं
आज उसका आरम्भ करने आया हूँ
पर तुमनें जो हमें अनदेखा किया
एक विरान से अक्ष ने दिल मेे घर किया
पर तू हैं तो एक गुलाबीं कलीं जो अभी अभी हैं खिली।।
हमारी आँखों में प्रतिबिम्ब जो उसका बना
हमारे दिल मेें एक हलचल सी हुई हैं
आज फिर जगे हैंं वो पुराानेें सपनेंं
आज फिर अपने आप सेे आया हूँ मिलने
कभी जो सोची थी हमारी कहानीं
आज उसका आरम्भ करने आया हूँ
पर तुमनें जो हमें अनदेखा किया
एक विरान से अक्ष ने दिल मेे घर किया
पर तू हैं तो एक गुलाबीं कलीं जो अभी अभी हैं खिली।।
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