जाने कितना समय निकल गया
अपने आप को देखे हुए
जाने कितना समय निकल गया
अपने आप से मिले हुए
आज देखा है सपने मैं एक चेहरा
शायद खुद को न पहचान पाया
कितना बदल गया हु मैं
अब तो न वो सादापन हैं
न वो जिद्दी हैं और कहा गई
वो चेहरे की मुस्कराहट
लगता है बदल सा गया हूँ मैं
खो गया हूँ मैं, नहीं जानता खुद को
जाने कितना समय निकल गया
आज मिलना हुआ फिर
अपने आप से
हाँ देखा मैंने उसके चेहरे पर
ख़ुशी को, हँसी को और
उसके दोस्तों का साथ
जब पलट कर खुद को देखा आईने मै
बस दुःख और चिंता है
शायद पहले खुश था
जब कुछ भी न था पर सब कुछ था
आज सब कुछ होकर भी कुछ नहीं,
जाने कितना समय निकल गया
जाने कितना समय निकल जायेगा
फिर से मैं बन जाने में ………।