Saturday, May 4, 2013

गज़ल

आँखों से जिनके नाम पे मोती बिखर गए 
उनसे मिले हुए तो ज़माने गुजर गए 

पत्ते तो वो भी थे जो गिरे हैं बहार में 
इल्जाम मौसमो के हवाओ के सर गए 

वो फूल जिंदगी की अलामत कहे गए 
खुशबु के नाम पर जो फ़ज़ा में बिखर गए 

आँखों के सएबान पे उतरी जो तेरी याद 
आँचल पे जाने कितने सितारे बिखर गए 

जैंसे थका परिंदा ठहर जाए शाख पर 
इस तरहा अशके गम सरे मिशगा ठहर गए 


अशकों ने तीरगी में बड़ा काम कर दिया
गम की अंधेर रात में जुगनू बिखर गए 

जलती हैं किस उम्मीद पे ऐ शम्मे आरजू 
उनको खफा हुए तो ज़माने गुजर गए 

मोती शनावरो का मुकददर हैं ऐ जीतू 
साहिल नशी तो शोरिशे तुंफा से डर गए . 

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