आँखों से जिनके नाम पे मोती बिखर गए
उनसे मिले हुए तो ज़माने गुजर गए
पत्ते तो वो भी थे जो गिरे हैं बहार में
इल्जाम मौसमो के हवाओ के सर गए
वो फूल जिंदगी की अलामत कहे गए
खुशबु के नाम पर जो फ़ज़ा में बिखर गए
आँखों के सएबान पे उतरी जो तेरी याद
आँचल पे जाने कितने सितारे बिखर गए
जैंसे थका परिंदा ठहर जाए शाख पर
इस तरहा अशके गम सरे मिशगा ठहर गए
अशकों ने तीरगी में बड़ा काम कर दिया
गम की अंधेर रात में जुगनू बिखर गए
जलती हैं किस उम्मीद पे ऐ शम्मे आरजू
उनको खफा हुए तो ज़माने गुजर गए
मोती शनावरो का मुकददर हैं ऐ जीतू
साहिल नशी तो शोरिशे तुंफा से डर गए .
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