Saturday, May 25, 2013

अब दिन नहीं गुजरता हैं यूँ आसां

अब दिन नहीं गुजरता हैं यूँ आसां ,
मन मैं एक युद्ध  सा चलता हैं ,

मैं अकेला नहीं हूँ आवाज़े हैं आस-पास ,
हाँ दिल को तन्हाइयों ने घेर रखा हैं ,

ये किसने काटे पंख मेरी कल्पनाओ के ,
ये किसने कैद किया मेरे मन को ,

लगता मैं आजाद नहीं ,
क्या मेरी इच्छाये ख़त्म हो गई ,

अब हर पल उदासी मैं रहता हूँ ,
अब दिन नहीं गुजरता हैं यूँ आसां,

ये धूप गिरती धरती पर ,
ये चमक क्यों चारो तरफ ,

या धरती हस रही हैं मुझ पर ,
मेरी नाकामयाबी पर, मेरी मज़बूरी पर ,
या मैं अपनी कमियों को देख रहा हूँ ,

दिनभर सोच मैं डूबा रहता हूँ कि ,
अब दिन नहीं गुजरता हैं यूँ आसां !  

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